COVID-19 pandemic के एक साल

COVID-19 pandemic के एक साल: एक थकी हुई दुनिया महामारी से उबरने की कोशिश करते हुए आगे बढ़ने के प्रयास में हैं

COVID-19 pandemic के एक साल: मार्च 2020, जब दुनिया ने covid-19 की वजह से पहली बार तबाही की एक झलक देखी थी.

ऐसे समय में लोगो को यही उम्मीद थी कि शायद यह महामारी एक दिन समाप्त हो जाएगी.

लेकिन आज इस COVID-19 pandemic के एक साल से अधिक का समय हो गया हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि covid-19 की वजह से भारत को भारी नुकसान हुआ हैं.

लेकिन ये भी उतना ही सच हैं कि हमने अब इस covid-19 से लड़ना सीख लिया हैं.

पिछले साल covid-19 महामारी ने अप्रत्याशित रूप से हमारे जीवन में प्रवेश किया था.

इस महामारी ने हमारी लगभग सारी गतिविधियों पर रोक लगा दी.

इसने दुनिया भर के लोगों के जीवन को प्रभावित किया और तनाव और चिंताओं की लड़ी लगा दी.

जिसके बाद लोगों के मन में नकारात्मक विचारों और ऊब के ढेर लग गए है.

COVID-19 pandemic के एक साल पूरे हो गए है.

इस वैश्विक महामारी से थकी हुई दुनिया अब महामारी से उबरने की कोशिश कर रही हैं.

साथ ही दुनिया अब आगे बढ़ने के प्रयास में भी हैं.

हमारे देश में भी बहुत बदलाव हुआ है जिसके बारे में हम यहां पर बता रहे हैं.

लोग अब सामान्य होने की ओर अग्रसर: COVID-19 pandemic के एक साल

करीब एक साल की लगाम के बाद बढ़ती ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण, ई-कॉमर्स, आदि के साथ दुनिया सामान्य होने की ओर अग्रसर है.

यात्रा, पर्यटन, मनोरंजन, शिक्षा, दूरस्थ कार्य, आदि में बड़े बदलाव हुए हैं.

लेकिन, बढ़ते ऑटोमेशन का एक नकारात्मक पहलू भी है.

बढ़ते ऑटोमेशन से दुनिया में बेरोजगारी बढ़ेगी, जो कई और दुश्वारियां को जन्म देगी.

यह बहुत बड़ी समस्या के रूप में उभर कर आने वाली है.

COVID-19 pandemic के दौरान इंटरनेट- नई सार्वजनिक उपयोगिता बनकर उभरी है

कोविड महामारी के बाद हमारे रोजमर्रा के जीवन में लगभग सभी गतिविधियां ऑनलाइन हो गयी है.

चाहे वर्क हो, शिक्षा, मनोरंजन, सामाजिककरण, खरीदारी आदि – ऑनलाइन चलने लगी हैं.

इंटरनेट ने कोविड-19 से संबंधित सूचना और डेटा प्रसारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 

इंटरनेट एक्सेस होने से यह लोगों के लिए एक प्रोत्साहन के साथ ही घर पर रहने के लिए भी प्रोत्साहित करने के रूप में उभर कर आया है.

इसकी सहायता से सामाजिक दूरी बनाने का और जीवन के साथ आगे बढ़ने का प्रयास हुआ है.

कम्प्युटर और इंटरनेट के उपयोग से लोगों को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, टेलीमेडिसिन सेवाओं, शैक्षिक संसाधनों, सरकार के निर्देशों की वास्तविक समय पर जानकारी मिलना मुमकिन हो सका हैं.

आज इंटरनेट की वजह से ही भोजन, किराने का सामान और दवाओं को ऑनलाइन ऑर्डर करने की सहूलियत मिली है.

इसे हमारी जिंदगी में बहुत बड़े स्तर का बदलाव आया है. 

covid-19 के एक साल पूरे हो गए हैं, इन एक साल में इंटरनेट और दूरसंचार से संबंधित सेवाओं को आवश्यक माना जाने लगा है.

वर्क फ्रॉम होम- लोगो ले लिए स्वर्ग बना

कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कदम के बाद वर्क फ्रॉम होम कल्चर एक नये कदम  के तौर पर आया है.

यह कर्मचारी और कंपनी दोनों के लिए हितकारी साबित हो रहा है.

कंपनियों का दफ्तर रखने और चलाने का खर्चा बच रहा है.

वहीं, कर्मचारियों को आने-जाने के खर्चे और समय, दोनों में ही राहत मिली है.

वर्क फॉम होम का एक महत्वपूर्ण पहलू जो इस सब में नजरअंदाज किया गया है वह है गृहणियों के लिए समय  का नुकसान.

भारत में पति और बच्चों की घर से चले जाने के बाद महिलाओं को खुद के लिए समय मिलता था.

लेकिन वर्क फ्रॉम होम अब वजह से अब बमुश्किल से मिलता है.

दूसरी ओर, घरों में हर चीज के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है. 

घर पर जो कुछ भी किया जा सकता है – जिम उपकरण से बेहतर मनोरंजन सुविधाओं, खाना पकाने के उपकरण के प्रयोगों, नई-नई चीजें चीजें बनाना आदि ने लोगों की  क्रिएटिविटी को सामने ला दिया.

 COVID-19 pandemic ने हमें सिखया थोड़ा ही काफी है

कोविड महामारी और लॉकडाउन ने भारतीयों को यह तो एक बार फिर से सिखा दिया है कि थोड़े में ही अपना काम चलाया जा सकता है.

उपभोक्ता पहले ही उन खर्चों में कटौती कर रहे हैं जो अभी संभव नहीं हैं या आवश्यक नहीं हैं.

जैसे विदेशी अवकाश. कई लोगों ने नया फ्रिज, वाहन  इत्यादि चीजें लेना लोगो ने स्थगित किया है.

बेफिजूल के कपड़े, जूते, एक्सेसरीज आदि के खर्चों पर लगाम लगाई गई है.

पिछले एक साल में जो बुनियादी जरूरतें हैं उन्हीं को खरीदा जा रहा है, जैसे किराना, मैडिसिन, अकेडिमिक बूक्स आदि.

 COVID-19 pandemic ने स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया

एंटरप्रेनएउर लोगों की एक लचीली नस्ल होती हैं, जो बाधाओं को झेलने के लिए ही बने होते हैं.

कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के दौरान इन्होंने अवसरों को देखा था.

इन एंटरप्रेनएउर्स ने अपने बिज़नस को आगे बढ़ाने और रेविन्यू को बनाए रखने के लिए “नई आवश्यकताओं” का लाभ उठाया.

इन्होंने जल्द ही ऑनलाइन मॉडल बनने के लिए ऑफ़लाइन मॉडल को देखा.

यह तुरंत ही समझ गए कि ग्राहक दूर नहीं गए थे.

यह सिर्फ इतना ही था कि इन ग्राहकों का व्यवहार बदल गया था.

 कुछ संस्थापकों ने नए अवसरों को देखा जहां वे अपनी दक्षताओं का लाभ उठा सकते हैं और व्यापार की नई लाइनें बना सकते हैं.

स्टार्टअप्स के लिए यह धुरी संभव है क्योंकि वे आसानी से स्थानांतरित हो सकते हैं और त्वरित चुस्त बदलाव कर सकते हैं.

यह ऐसे एंटरप्रेनएउर हैं जो कठिन समय में मूल्यवान और लचीला व्यवसाय बनाने का अवसर देखते हैं.

महामारी इसलिए एक उत्प्रेरक थी, जो उन लोगों के लिए एक गेम चेंजर थी जो अपने खेल को बदल सकते थे.

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 COVID-19 pandemic के एक साल ने ‘स्वच्छता जागरूकता है’, ये सिखाया

 कोविड -19 प्रसार ने होमकेयर और पर्सनल केयर उत्पाद के लिए जागरूकता बढ़ा दी है.

लोग स्वच्छता,  और खुद को और अपने पर्यावरण को रोगाणु-मुक्त रखने के बारे में अधिक जागरूक हो गए हैं. 

हालाँकि आय और बचत में कमी आई है, जो उपभोक्ताओं के विवेकाधीन खर्चों को प्रभावित कर रही है

लोगों को व्यक्तिगत और घरेलू खरीद के प्रति अधिक से अधिक प्रयोज्य आय आवंटित करते हुए देखा जाता है क्योंकि उपभोक्ता प्राथमिकता सूची में अचानक फिर से सुधार किया गया है.

 एक सर्वे के अनुसार, अभूतपूर्व 87.2 प्रतिशत भारतीय अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति सतर्क हो गए हैं.

यह जागरूकता ऐसे वक्त में आई हैं, जब दुनिया घातक कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रही है जो खांसी और छींकने से फैलता है.

 Covid-19 ने पूरा किया एक साल, डगमगाती अर्थव्यवस्था संभलने की ओर

 लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को रोक दिया क्योंकि कारखाने बंद थे, ट्रेनें रोक दी गईं और उड़ानें निलंबित कर दी गईं.

इसने जून तिमाही में अर्थव्यवस्था को 24.4 प्रतिशत के सबसे खराब संकुचन के रूप में पहुँचा दिया.

इसके बाद जुलाई-सितंबर में 1 -7.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसने अर्थव्यवस्था को एक दुर्लभ मंदी में धकेल दिया. 

हालांकि, दिसंबर की तिमाही में जीडीपी अपने पूर्व महामारी स्तर को पार करते हुए, अर्थव्यवस्था का पलटाव उम्मीद से बेहतर रहा, जो साल-दर-साल बढ़कर 0.4 प्रतिशत हो गया.

 अगले वित्त वर्ष में, बजट में टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

सरकार ने जरूरत पड़ने पर इसे और अधिक बढ़ाने का आश्वासन दिया है.

वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के अनुसार, “पिछले पांच महीनों में GST कलेक्शन लगातार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक था … क्योंकि सरकार द्वारा कोविड -19 के दौरान उठाए गए कदमों के कारण, आर्थिक सुधार हो रहा है. और दुनिया भर में, एजेंसियों ने भारत को कहा है कि 2021-22 में दोहरे अंकों में विकास हुआ.”

इस तरह हम देखते हैं कि covid-19 pandemic और लॉकडाउन के बाद हमारे देश में बहुत बड़े स्तर का बदलाव आया है.

यह बदलाव ऐसी कठिन परिस्थि में एक पॉज़िटिव चेंज तो है ही साथ ही नए युग का परिचालक भी है.

यह हमें यह भी सिखाती हैं कि सिचुएशन चाहे कितनी भी मुश्किल क्यूँ ना हो, हमें हार नहीं माननी चाहिए।

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