कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत !

प्रधानमंती नरेंद्र मोदी का सपना आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल, चाइनीज सामान का बहिष्कार करें और स्वदेशी अपनाये।

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
प्रधानमंती नरेंद्र मोदी का सपना आत्मनिर्भर भारत

आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत! प्रधानमंती नरेंद्र मोदी का सपना आत्मनिर्भर भारत!

वोकल फॉर लोकल! इसे हमें आगे बढ़ाना हैं। गौरतलब हैं कि इसके लिए चाइनीज सामान का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाना होगा।

हालांकि यही एक मात्र विकल्प हैं, जिससे हमार देश अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा।

तेजी से बढ़ती आबादी को रोजगार प्रदान करने के लिए स्वदेशी चीजें का निर्माण करना बेहद जरूरी है। इसको ध्यान में रखकर ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरूआत की गई है।

इसके अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा 20 लाख करोड़ रुपए देने का एलान किया है।

आखिर कैसे पूरा होगा आत्मनिर्भर भारत का सपना

एक ओर भारत अपनी जरूरत की अधिकतर चीजों के लिए खुद पर निर्भर हो जाए यह जरूरी हैं।

दूसरी ओर आत्मनिर्भर अभियान के तहत लोगों को कामकाज करने की सुविधा उपलब्ध करवाना भी अवश्यक हैं।

ऐसा करने से हमारे देश की उन्नति होगी और तभी हम आगे बढ़ पाएंगे।

इसके साथ ही हमें कुछ ऐसी आदतें अपनानी होगी जिससे देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद हो सके।

स्वदेशी अपनाये-भारत को आत्मनिर्भर बनाए

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
वोकल फॉर लोकल

भारत को स्वतंत्र कराने में “स्वदेशी आदोलन” का महत्वपूर्ण योगदान है।

यह आंदोलन भारत को विकासशील और आर्थिक रूप से बलशाली बनाने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया था।

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार करना और स्वदेशी उत्पादों को अपनाना था।

देश के नागरिकों द्वारा लिया गया सही निर्णय देश को औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकता है।

आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत ! इस प्रश्न का जवाब हमें खुद से तलाशना होगा।

हमें निश्चय करना होगा की हम “वोकल फॉर लोकल” बने और देश की आर्थिक उन्नति में अपना योगदान देंगे।

चीन को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से भी यह अभियान शुरू किया गया है।

इसलिए चाइनीज सामान का बहिष्कार करें और स्वदेशी अपनाये।

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत;क्या चीन पर ख़त्म होगी भारत की निर्भरता

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एक तरफ तो चीन भारत में अपने व्यापार का प्रसार कर रहा हैं, तो दूसरी ओर सीमा पर तनाव का माहौल बनाए हुआ हैं।

चीन के दोहरे रवैये से आहत होकर भारत ने चीन पर डिजिटल वार किया है।

गौरतलब हैं कि भारत ने एक झटके में टिक टॉक समेत कई ऐप्स को बैन कर दिया है।

एक ओर जहाँ, मोदी सरकार के इस निर्णय के बाद से चीन में खलबली मचा हुआ है।

वही दूसरी ओर चीन को एक और सबक सिखाने कि तैयारी शुरू हो गयी है।

वर्तमान में, भारत के लोग नेपाल के चाइनीज पावर प्रोजेक्ट से बिजली ना खरीदने की भी मांग कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत के लिए वोकल फॉर लोकल बने

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

चीन के उत्पादों का करना होगा बहिष्कार तभी वोकल फॉर लोकल का हमारा सपना पूरा होगा।

हाल ही में कैट (कोन्फिडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने अपने राष्ट्रीय अभियान- ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ के अंतर्गत कमोडिटी की 450 से अधिक कैटेगरी की वृहद सूची जारी की।

इस सूची में 3000 से अधिक ऐसे उत्पाद हैं, जो प्राय: चीन में बन कर भारत में आयात किए जाते हैं जबकि भारत में भी इन चीजों का निर्माण होता है।

इन चीजों के बहिष्कार का आह्वान कैट ने अपने अभियान के प्रथम चरण में किया है।

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत; भारतीय ट्रेडर्स की मेगा एक्शन प्लान

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत!

भारतीय ट्रेडर्स ने भी अपनी कमर कस ली हैं।

उन्होने चीन को कारोबार के मोर्चे पर करारी शिकस्त देने के लिए एक मेगा एक्शन प्लान तैयार किया।

इस प्लान के जरिये दिसंबर 2021 तक चीन से आयात की जाने वाली वस्तुओं कम करके इनके वैल्यू को 1 लाख करोड़ से नीचे लाने की तैयारी है।

ट्रेडर्स ने आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के लिए पहले से चीनी उत्पादों के बहिष्कार का कैंपेन चला रहे हैं।

आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत !सरकारी ठेकों में चीन का बहिष्कार

गलवान की घटना के बाद चीन से होने वाले व्यापार पर काफ़ी प्रभाव पड़ा हैं।

भारत में चीनी निवेश और प्रोजेक्ट व सर्विसेजज पर लगाम लगाने की व्यापक अभियान की तैयारी हो रही है।

सरकारी ठेकों और परंपरागत परियोजनाओं से चीनी कंपनियों को हटाने के सिलसिला की शुरूआत हो गयी है।

चीन की कंपनी बीजिंग एसपीसी एनवायरनमेंट पोटेक्शन टेकज को यमुनानगर स्थित दीनबंधु छोटूराम थर्मल पावर प्लांट के लिए ठेका दिया गया था।

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत! सरकारी ठेकों में चीन का बहिष्कार

इसके अलावा शंघाई इलेक्ट्रिक कॉर्पज का चयन हिसार के राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट के लिए किया गया था।

इन कंपनियों को इन दोनों संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाना था। जिसकी लागत करीब 780 करोड़ रुपए की थी।

अब राज्य सरकार ने इन ठेकों को निरस्त कर नए सिरे से ठेका देने का फैसला लिया है।

अच्छी बात यह हैं कि इसमें सिर्फ भारत में पंजीकृत कंपनियां भाग ले सकेंगी।

हालमें ही महाराष्ट्र सरकार और चीनी कंपनियों के साथ हुए समझौते को राज्य में बहुत बड़े विरोध का सामना करना पड़ा था।

इस कारण अब उम्मीद है कि ये समझौतों के रद्द किए जा सकते हैं।

भारत के आत्मनिर्भर बनने से क्या चीन खो देगा अपना बड़ा मार्केट?

आपने कभी इस बात पर गौर किया हैं कि आपके दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली 10 चीजों में 8 चीजें चीन में निर्मित होती हैं।

आख़िर ऐसा क्यूँ हैं। आज के परिदृश्य में चीन से भारत लगभग 5.25 लाख करोड़ रुपए अर्थात 70 अरब डॉलर वार्षिक के चीजों का आयात का करता है।

लेकिन यदि भारत से चीन में निर्यात कि बात करें तो यह पाँच गुना कम हैं।

परंतु लोगो का गुस्सा अब बढ़ रहा हैं। वोकल फॉर लोकल की मांग ने ज़ोर पकड़ लिया हैं।

आत्मनिर्भर भारत के लिए अवशयक हैंआयात निर्यात के बीच संतुलन

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

भारत चीन के मध्य आयात निर्यात को संतुलित करने की अवश्यकता हैं।

चीन भारत से जितना का माल खरीदता है उसके पांच गुना अधिक मूल्य का माल वह भारत में बेचता है।

2018-19 में भारत ने चीन को 16.7 अरब डॉलर यानी 1.2 लाख करोड़ रुपए का निर्यात किया।

जबकि इस अवधि में 70.3 अरब डॉलर का यानी करीब 5.32 लाख करोड़ रुपए का आयात किया।

यानी मोटेतौर पर हम कह सकते हैं कि भारत को 4.1 लाख करोड़ रुपए का व्यापार घाटा हुआ।

इस तरह से अगर भारत चीन के साथ कारोबार खत्म करता है तो इसका सीधा असर चीन के बाजार को होगा।

वह अपना माल खपाने का एक बहुत बड़ा बाजार खो देगा।

देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कानून को आसान बनाना होगा

वैसे तो हमारे देश में कई तरह की सुविधाएं हैं लेकिन यहां कि सबसे बड़ी कमजोरी सरकारी सिस्टम हैं।

यह बहुत ही थकाऊ और उबाऊ प्रक्रिया है। यह बहुत अधिक जटिल हैं। देश का टैक्स कानून भी बहुत पेचीदा हैं, जिसमें कारोबारी उलझ कर रह जाते है।

वैसे जीएसटी के आने से कारोबारियों को काफी सहूलियत मिली हैं। परंतु हमें इस दिशा में और सुधार लाने कि आवश्यकता हैं, क्योंकि ऐसे में कारोबार या व्यापार करना सुविधा नहीं सजा बन जाती है।

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आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत ! कपटेटिव टैक्स व्यवस्था जरूरी

कारोबार को अधिक सुगम बनाने के लिए आवश्यकता है एक कपटेटिव टैक्स व्यवस्था की।

कारोबारियों की इनपुट कॉस्ट ही इतनी हो जाती है कि उनके लिए सस्ते मूल्य पर दुनिया के लिए निर्माण करना संभव नहीं होता।

हमें सबसे पहले अपने प्रक्रियाओं को आसान करने की ओर ध्यान देना होगा।

प्रोसेस रिफॉर्म के चलते ही हमारी इंडस्ट्री प्रतिस्पर्धात्मक बन पाएँगी।

इससे हमारा प्रॉडक्शन सिस्टम न सिर्फ हमारे लिए, बल्कि विश्व के लिए निर्माण करने में सक्षम होगी।

यही होगा आत्म निर्भरता की ओर हमारा पहला कदम।

निर्भर भारत बनने के उपाय

कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत
कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

कोरोना त्रासदी के इस दौर में जहाँ पूरी दुनिया सप्लाई चेन के लिए विकल्प तलाश रही है।

भारत एक मज़बूत विकल्प के रूप में दिखाई दे रहा हैं। भारत में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए विदेशी रुझान बढ़ी है।

शायद ही अब कोई देश चीन पर उस तरह से निर्भर नहीं रहेगा। जिस तरह से पहले रहा है।

हमारे उद्यमी, हमारे कारोबारी और कामगार वर्ल्ड-क्लास उत्पाद बनाने में पूरी तरह सक्षम है।

हमने कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया है।

फर्नीचर इंडस्ट्री हमारे देश में बहुत अधिक विस्तृत हैं।

इस से ही हम 50 अरब डॉलर का निर्यात कर सकते हैं। जिसमें 20 से 30 लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है।

खाद्यान्न खरीद कार्यक्रम का विस्तार किया गया है। इससे कृषि पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।

इसके साथ ही यदि मंजूरी देने का अधिकार केवल एक हाथों में होगा तो सप्लाई चेन भारत आएगी।

इसका तात्पर्य हैं मंजूरी के लिए सेंट्रलाइज़्ड़ सिस्टम होनी चाहिया। हमें देश में ही कम जोखिम वाली पूंजी तैयार करना होगी।

पेंशन फंड और इंश्योरेंस फंड का इस्तेमाल भी इस दृष्टिकोण से किया जा सकता है। इससे बहुत अधिक लाभ मिलेगी।

आखिर कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत ! इस प्रश्न का जवाब हमें इस लेख में मिल गया हैं। इस तरह हमारा देश खुद की बनाई हुई चीजों पर निर्भर हो कर आत्मनिर्भर बनने में सक्षम होगा।

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